शंकराचार्य के खिलाफ एफआईआर के विरोध में कांग्रेस का ज्ञापन, धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन का आरोप
फिरोजाबाद में जिला कांग्रेस कमेटी ने शंकराचार्य के विरुद्ध दर्ज एफआईआर के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार पर धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
जिला कांग्रेस कमेटी का कहना है कि वर्तमान सरकार आलोचना सहन नहीं कर पा रही है और जो भी व्यक्ति सरकार की नीतियों के विरुद्ध आवाज उठाता है, उसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सनातन परंपरा के प्रतिष्ठित धर्मगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एवं उनके शिष्यों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि कुंभ पर्व के दौरान मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य को कथित रूप से पुलिस बल के माध्यम से पवित्र स्नान से रोका गया। साथ ही उनके साथ आए बटुकों के साथ मारपीट करने और उन्हें थाने ले जाकर प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया गया। कांग्रेस का कहना है कि अब शंकराचार्य और उनके शिष्यों के खिलाफ कथित रूप से झूठी एफआईआर दर्ज की गई है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
कांग्रेस ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का हवाला देते हुए कहा कि ये प्रावधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता तथा धार्मिक संस्थाओं को अपने धर्म के पालन और प्रबंधन का मौलिक अधिकार प्रदान करते हैं। पार्टी के अनुसार, शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में सर्वोच्च आध्यात्मिक पदों में से एक है, जिसकी मान्यता ऐतिहासिक और धार्मिक परंपराओं से निर्धारित होती है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि शंकराचार्य के विरुद्ध दर्ज एफआईआर की पृष्ठभूमि, परिस्थितियों एवं संभावित कारणों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए, ताकि सत्य सामने आ सके। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि किसी दुर्भावनापूर्ण मानसिकता के तहत कार्रवाई की गई तो पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य