श्रम संहिताओं के विरोध में ट्रेड यूनियनों का प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम भेजा ज्ञापन
फिरोजाबाद। नई श्रम संहिताओं और केंद्र सरकार की श्रम नीतियों के विरोध में श्रमिक संगठनों ने आवाज़ तेज कर दी है। इसी क्रम में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स से जुड़े पदाधिकारियों ने जनपद फिरोजाबाद में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रेषित कर अपनी मांगें रखीं और 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी आंदोलन के आह्वान की जानकारी दी।
ज्ञापन में कहा गया है कि हाल ही में लागू की गई नई श्रम संहिताओं से मजदूरों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं, जबकि रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। श्रमिक संगठनों का आरोप है कि नई व्यवस्था से हड़ताल की प्रक्रिया जटिल होगी, ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा और स्थायी नौकरियों में कमी आ सकती है।
ट्रेड यूनियनों ने चारों श्रम संहिताओं को निरस्त करने, बिजली और बीज संशोधन विधेयकों को वापस लेने, मनरेगा को मजबूत करने और न्यूनतम वेतन बढ़ाने सहित कई प्रमुख मांगें उठाई हैं। इसके साथ ही संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों के नियमितीकरण, पुरानी पेंशन योजना की बहाली तथा सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।
ज्ञापन में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा, समान कार्य के लिए समान वेतन और सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। साथ ही जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और दवाओं पर जीएसटी समाप्त करने की मांग भी शामिल है।
श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया गया है।