पिंक सिटी टाइम्स

विराट संत सम्मेलन में संस्कार और दान का संदेश, मानव जीवन को दिशा देने की अपील
फिरोजाबाद। अखिल भारतीय सोहम महामण्डल शाखा फिरोजाबाद के 46वें भव्य आयोजन के तहत आयोजित विराट संत सम्मेलन में संतों ने संस्कार और दान को समाज निर्माण की मूल शक्ति बताया। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे सोहम पीठाधीश्वर स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि संस्कार व्यक्ति के चरित्र को मजबूत करते हैं, जबकि दान समाज में सेवा और करुणा की भावना को जीवंत रखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना संस्कार के ज्ञान अधूरा और बिना दान के सामाजिक समरसता असंभव है।
स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि जब व्यक्ति अपने जीवन में संस्कार और दान को आत्मसात करता है, तभी समाज मानवता से देवत्व की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने आयोजन से जुड़े दानदाताओं, सहयोगियों और मीडिया प्रतिनिधियों का आभार भी व्यक्त किया।
सम्मेलन में म.म. स्वामी शुकदेवानंद महाराज ने कहा कि दान केवल धन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समय, श्रम और सकारात्मक सोच का दान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। स्वामी रामशरण दास महाराज ने दान को आत्मिक शांति और पुण्य प्राप्ति का माध्यम बताया। वहीं स्वामी प्रीतमदास महाराज ने कहा कि संस्कार ही व्यक्ति को श्रेष्ठ नागरिक बनाते हैं और वही परिवार, समाज और राष्ट्र को सुदृढ़ करते हैं।
इसके अलावा स्वामी निगमानंद, स्वामी नारायणानंद, स्वामी शिवानंद, स्वामी सच्चिदानंद, स्वामी सदानंद और स्वामी सुबोध स्वरूप महाराज ने अपने विचार रखते हुए कहा कि संस्कार और दान के बिना सभ्य समाज की कल्पना संभव नहीं है।
कार्यक्रम से पूर्व श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन वृंदावन से आए पं. रामगोपाल शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। इस अवसर पर प्रस्तुत रुक्मिणी विवाह की झांकी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही, जिससे पूरा पंडाल भक्तिरस में डूबा नजर आया।
कार्यक्रम में उमाशंकर मिश्रा, श्याम बाबू अग्रवाल, डॉ दिलीप यादव, पंडित मुन्नालाल शास्त्री, देवकी नंदन अग्रवाल, हरिओम गुप्ता, जेपी मित्तल, विमल गुप्ता, डॉ ब्रजेश गुप्ता, प्रकाश चंद्र गुप्ता, डॉ मयंक भटनागर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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