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लखनऊ के प्रवेश द्वार बनेंगे संस्कृति और आस्था की पहचान, मुख्यमंत्री योगी ने दिए भव्य निर्माण के निर्देश
लखनऊ।
राजधानी लखनऊ को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान देने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार शाम राजधानी के प्रमुख प्रवेश मार्गों को लेकर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि लखनऊ के 07 प्रमुख प्रवेश द्वारों पर उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत को दर्शाने वाले भव्य प्रवेश द्वार विकसित किए जाएं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजधानी में प्रवेश करते ही आगंतुकों को यह अनुभूति होनी चाहिए कि वे उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना के केंद्र में प्रवेश कर रहे हैं। प्रवेश द्वार प्रदेश की परंपरा, आस्था और गौरवशाली इतिहास के प्रतीक बनें।
इन मार्गों पर बनेंगे विशेष प्रवेश द्वार
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार विभिन्न प्रमुख मार्गों पर निम्नलिखित थीम आधारित प्रवेश द्वार विकसित किए जाएंगे—
रायबरेली–प्रयागराज मार्ग: संगम द्वार
सुल्तानपुर–वाराणसी मार्ग: नंदी द्वार
बाराबंकी–अयोध्या मार्ग: सूर्य द्वार
सीतापुर–नैमिषारण्य मार्ग: व्यास द्वार
हरदोई–हस्तिनापुर मार्ग: धर्म द्वार
आगरा–मथुरा मार्ग: कृष्ण द्वार
उन्नाव–झांसी मार्ग: शौर्य द्वार
CSR फंड से होगा निर्माण
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इन प्रवेश द्वारों के निर्माण में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का प्रभावी उपयोग किया जाए, जिससे सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त भार न पड़े और सामाजिक सहभागिता को भी बढ़ावा मिले।
पारंपरिक वास्तुकला पर होगा विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवेश द्वारों के डिजाइन में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला, शिल्पकला और सांस्कृतिक प्रतीकों का समावेश अनिवार्य रूप से किया जाए। पत्थर की नक्काशी, स्तंभ, भित्ति चित्र (म्यूरल), फव्वारे, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था और हरित परिदृश्य के माध्यम से प्रवेश द्वारों को न केवल सौंदर्यपूर्ण बल्कि भावनात्मक और अर्थपूर्ण बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि इन द्वारों के माध्यम से यात्रियों को लखनऊ में प्रवेश करते ही एक विशिष्ट सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त होना चाहिए, जो प्रदेश की पहचान को मजबूती से स्थापित करे।
सरकार के इस निर्णय से राजधानी लखनऊ की छवि एक आधुनिक शहर के साथ-साथ सांस्कृतिक राजधानी के रूप में और सशक्त होने की उम्मीद है।

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