फिरोजाबाद में टैक्स वसूली का मेगा ड्राइव: 107 बड़े बकाएदारों पर कुर्की की तलवार
सुहागनगरी में इस बार नगर निगम ने साफ संकेत दे दिया है—“सुविधाएं लेंगे तो टैक्स भी देना होगा।” गृहकर, जलकर और सीवरकर के करोड़ों रुपये बकाया रहने पर नगर निगम ने 107 बड़े बकाएदारों के खिलाफ कुर्की और नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 504 के तहत जारी नोटिसों ने शहर के प्रभावशाली नामों से लेकर संस्थानों तक में हलचल मचा दी है।
नगरायुक्त प्रशांत नागर के निर्देश पर सहायक नगर आयुक्त, कर निर्धारण अधिकारी और कर अधीक्षक की संयुक्त टीमें प्रवर्तन दल के साथ तय तिथियों में कार्रवाई करेंगी। निगम का कहना है कि बार-बार नोटिस और समय देने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ, इसलिए अब सख्ती ही विकल्प है।
बड़े नाम, बड़ा बकाया
नगर निगम के रिकॉर्ड में कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों पर लाखों रुपये लंबित हैं। उदाहरण के तौर पर—
गौरव शर्मा (किशन नगर) — ₹32.52 लाख
महेश चंद्र (महर्षि क्षेत्र) — ₹11.33 लाख
बबलू यादव (आसफाबाद) — ₹9.63 लाख
कालीचरन (प्रताप नगर सैलई) — ₹7.88 लाख
बाबूराम (दयाल नगर) — ₹5.59 लाख
बालकिशन (भरत नगर) — ₹5.42 लाख
शकुंतला देवी (बौधाश्रम) — ₹4.59 लाख
इन आंकड़ों से साफ है कि बकाया सिर्फ छोटे करदाताओं तक सीमित नहीं है।
व्यावसायिक संस्थान भी रडार पर
निगम ने साफ कर दिया है कि व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को कोई छूट नहीं मिलेगी।
दयाल नगर कोटला रोड स्थित सत्कार टॉकीज — ₹6.16 लाख
उर्दू नगर स्थित केजीएन हॉस्पिटल — ₹4.78 लाख
दोनों को कुर्की नोटिस जारी हो चुके हैं और भुगतान न होने पर आगे की कार्रवाई तय है।
रियल एस्टेट और किराएदार भी शामिल
गजानन रियल एस्टेट से जुड़े पंडित अशोक दीक्षित — ₹3.17 लाख
जयशिव वाटिका, श्रीराम कॉलोनी — ₹5.16 लाख
सुरेशनी मित्तल (रोशन गंज) — ₹3.22 लाख
किराएदारों को भी बकाया चुकाने के लिए नोटिस दिए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि अभियान व्यापक स्तर पर चल रहा है।
धार्मिक स्थल भी सूची में
नगर निगम ने धार्मिक संस्थानों को भी बकाया मामले में अलग श्रेणी में नहीं रखा—
मस्जिद समरिया (सदर बाजार) — ₹1.15 लाख
पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर — ₹47,664
स्वामी नित्यानंद आश्रम (नगला करन सिंह) — ₹3.04 लाख
गोपाल आश्रम — ₹37.52 लाख
इन सभी को भी कुर्की नोटिस जारी किए गए हैं।
बड़ा संदेश क्या है?
यह कार्रवाई केवल वसूली नहीं, बल्कि कर अनुशासन का संदेश भी है। पहली बार इतने बड़े स्तर पर नामचीन व्यक्तियों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और धार्मिक संस्थानों को एक साथ नोटिस जारी किए गए हैं।
नगर निगम का लक्ष्य साफ है—लंबित राजस्व की वसूली कर शहर के विकास कार्यों को गति देना। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बकाएदार भुगतान करते हैं या कुर्की की कार्रवाई जमीन पर उतरती है।