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आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों की टीईटी से छूट की मांग, फिरोजाबाद में प्रदर्शन
फिरोजाबाद। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से राहत देने की मांग को लेकर गुरुवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री Narendra Modi को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
यह कार्यक्रम ‘टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के बैनर तले दोपहर करीब एक बजे शुरू हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से अध्यादेश लाकर आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की बाध्यता से मुक्त करने की मांग की।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि उत्तर प्रदेश में आरटीई अधिनियम वर्ष 2011 से लागू हुआ। इसके बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया था, जबकि इससे पहले नियुक्त शिक्षकों को इस शर्त से छूट प्राप्त थी।
शिक्षकों ने बताया कि 1 सितंबर 2025 को आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद अब आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए भी सेवा में बने रहने और पदोन्नति पाने हेतु टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक कर दिया गया है। उनका कहना है कि नियुक्ति के समय जो नियम लागू थे, उसी आधार पर उनकी सेवा शर्तें निर्धारित हुई थीं, ऐसे में वर्षों बाद नई अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
संघ की राष्ट्रीय सचिव कल्पना बाजौरिया सहित अन्य पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर और तेज किया जाएगा।

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